कुरान - 19:98 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

98
وَكَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّن قَرۡنٍ هَلۡ تُحِسُّ مِنۡهُم مِّنۡ أَحَدٍ أَوۡ تَسۡمَعُ لَهُمۡ رِكۡزَۢا

Transliteration: (Wa kam ahlaknaa qabla hum min qarnin hal tuhissu minhum min ahadin aw tasma'u lahum rikzaa (section 6))

और हमने उनसे पहले कितनी ही क़ौमों को हलाक कर दिया; क्या आप उनमें से किसी एक को भी पाते हैं या उनकी कोई धीमी सी आहट भी सुनते हैं? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 98 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 98

✅ सूरह मरयम का पुर-असर ख़ात्मा: गुज़री क़ौमों की ख़ामोशी और इब्रत

सूरह मरयम का इख़्तिताम इस पुर-असर सवाल पर होता है: पिछली कितनी ही सरकश और ताक़तवर क़ौमों को अल्लाह ने नेस्तनाबूद कर दिया। आज न उनका कोई नामलेवा बचा है और न उनकी कोई धीमी सी सरगोशी सुनाई देती है। सब खाक में मिल गए। यह मौजूदा और आने वाले तमाम इंसानों के लिए होश के नाखून लेने और रब की तरफ़ रुजू करने की अज़ीम दावत है।

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