कुरान - 19:1 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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كٓهيعٓصٓ

Transliteration: (Kaaaf-Haa-Yaa-'Ayyyn-Saaad)

काफ़-हा-या-ऐन-साद। (हुरूफ़े मुक़त्तआत, जिनका हक़ीक़ी इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 1

✅ हुरूफ़े मुक़त्तआत की अज़मत

सूरह मरयम का आग़ाज़ इन मुक़द्दस हुरूफ़े मुक़त्तआत (काफ़-हा-या-ऐन-साद) से होता है। ये क़ुरआन मजीद के वे राज़ हैं जिनका हक़ीक़ी इल्म अल्लाह तआला ही के पास है। ये इस बात की दलील हैं कि क़ुरआन अरबी ज़बान के हुरूफ़ से बना होने के बावजूद इंसानी ताक़त से बहुत बुलंद और अल्लाह का मोजिज़ा कलाम है।

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