Transliteration: (Kaaaf-Haa-Yaa-'Ayyyn-Saaad)
सूरह मरयम का आग़ाज़ इन मुक़द्दस हुरूफ़े मुक़त्तआत (काफ़-हा-या-ऐन-साद) से होता है। ये क़ुरआन मजीद के वे राज़ हैं जिनका हक़ीक़ी इल्म अल्लाह तआला ही के पास है। ये इस बात की दलील हैं कि क़ुरआन अरबी ज़बान के हुरूफ़ से बना होने के बावजूद इंसानी ताक़त से बहुत बुलंद और अल्लाह का मोजिज़ा कलाम है।
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