Transliteration: (Wa innee khiftul mawaaliya minw waraaa'ee wa kaanat imra atee 'aqiran fa hablee mil ladunka waliyyaa)
हज़रत ज़करिय्या को दुनियावी मालो-दौलत के वारिस की नहीं, बल्कि नबुव्वत, इल्म और दीन की विरासत सँभालने वाले नेक जानशीन की फ़िक्र थी। उन्हें डर था कि उनके बाद बनी इस्राईल दीन को बर्बाद न कर दें। ज़ाहिरी तौर पर बीवी बांझ थी और खुद इन्तेहाई बूढ़े थे, मगर उन्हें अल्लाह की क़ुदरत पर मुकम्मल भरोसा था।
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