कुरान - 19:5 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَإِنِّي خِفۡتُ ٱلۡمَوَٰلِيَ مِن وَرَآءِي وَكَانَتِ ٱمۡرَأَتِي عَاقِرٗا فَهَبۡ لِي مِن لَّدُنكَ وَلِيّٗا

Transliteration: (Wa innee khiftul mawaaliya minw waraaa'ee wa kaanat imra atee 'aqiran fa hablee mil ladunka waliyyaa)

'और मुझे अपने बाद अपने रिश्तेदारों (के दीन से ग़ाफ़िल होने) का ख़ौफ़ है, और मेरी बीवी भी बाँझ है; पस तू मुझे अपने पास से एक वारिस (बेटा) अता फ़रमा;' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 5

✅ दीनी विरासत की फ़िक्र और नेक वारिस की तलब

हज़रत ज़करिय्या को दुनियावी मालो-दौलत के वारिस की नहीं, बल्कि नबुव्वत, इल्म और दीन की विरासत सँभालने वाले नेक जानशीन की फ़िक्र थी। उन्हें डर था कि उनके बाद बनी इस्राईल दीन को बर्बाद न कर दें। ज़ाहिरी तौर पर बीवी बांझ थी और खुद इन्तेहाई बूढ़े थे, मगर उन्हें अल्लाह की क़ुदरत पर मुकम्मल भरोसा था।

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