कुरान - 19:4 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
قَالَ رَبِّ إِنِّي وَهَنَ ٱلۡعَظۡمُ مِنِّي وَٱشۡتَعَلَ ٱلرَّأۡسُ شَيۡبٗا وَلَمۡ أَكُنۢ بِدُعَآئِكَ رَبِّ شَقِيّٗا

Transliteration: (Qaala Rabbi innee wahanal 'azmu minnee washta 'alar ra'su shaibanw wa lam akun bidu'aaa'ika Rabbi shaqiyyaa)

उन्होंने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो चुकी हैं और सर (बुढ़ापे के) सफ़ेद बालों से भड़क उठा है, और ऐ मेरे रब! मैं तुझसे दुआ मांग कर कभी महरूम (नाकाम) नहीं रहा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 4

✅ बुढ़ापे की बेबसी और अल्लाह के करम पर भरोसा

हज़रत ज़करिय्या ने अपनी ज़ईफ़ी का नक़्शा खींचा कि बदन की हड्डियाँ पोची हो गई हैं और पूरा सर सफ़ेद बालों से चमक उठा है। साथ ही अपने रब के पिछले एहसानात को याद किया कि ऐ रब! तूने ज़िन्दगी भर मेरी हर दुआ को क़ुबूल फ़रमाया है, मैं कभी तेरी बारगाह से ख़ाली हाथ नहीं लौटा।

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