कुरान - 19:77 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
أَفَرَءَيۡتَ ٱلَّذِي كَفَرَ بِـَٔايَٰتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالٗا وَوَلَدًا

Transliteration: (Afara'aytal lazee kafara bi Aayaatinaa wa qaala la oota yanna maalanw wa waladaa)

क्या आपने उस शख़्स (आस बिन वाइल) को देखा जिसने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा, 'मुझे तो (आख़िरत में भी) ज़रूर माल और औलाद दी जाएगी!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 77

✅ मुशरिक सरदार का तकब्बुर और मज़ाक़

हज़रत ख़ब्बाब बिन अरत (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने आस बिन वाइल मुशरिक से अपनी मज़दूरी मांगी, तो उसने मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा कि जब तक तुम मुहम्मद (ﷺ) का इनकार नहीं करोगे मैं पैसे नहीं दूंगा। हज़रत ख़ब्बाब ने कहा कि मैं मरने और दोबारा उठने तक इनकार नहीं करूँगा। इस पर उसने तकब्बुर से कहा कि अच्छा, अगर दोबारा ज़िन्दगी हुई तो मुझे वहाँ भी बहुत सारा माल और औलाद मिलेगी, तब तुम्हारा क़र्ज़ चुकाऊँगा!

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