कुरान - 50:11 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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رِّزۡقٗا لِّلۡعِبَادِۖ وَأَحۡيَيۡنَا بِهِۦ بَلۡدَةٗ مَّيۡتٗاۚ كَذَٰلِكَ ٱلۡخُرُوجُ

Transliteration: (Rizqal lil'ibaad, wa ahyainaa bihee baldatam maitaa; kazaalikal khurooj)

बंदों की रोज़ी के लिए; और हमने उसके ज़रिए मुर्दा शहर (ज़मीन) को ज़िंदा कर दिया; इसी तरह (क़ब्रों से) तुम्हारा निकलना होगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 11

✅ मुर्दा ज़मीन का ज़िंदा होना और हश्र

जिस तरह बारिश से बंजर और मुर्दा ज़मीन लहलाहा उठती है, ठीक उसी तरह क़यामत के दिन इसराफ़ील के सूर फूंकने पर तमाम इंसान अपनी क़ब्रों से ज़िंदा होकर निकल पड़ेंगे।

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