Transliteration: (Qaaaf; wal Qur aanil Majeed)
सूरह क़ाफ़ हुरूफ़े मुक़त्तआत 'क़ाफ़' से शुरू होती है। अल्लाह तआला ने बुज़ुर्ग और आलीशान क़ुरआन की क़सम खाकर इस बात की ताकीद फ़रमाई कि नबी-ए-करीम (सल्ल.) सच्चे पैग़म्बर हैं और क़यामत बरहक़ है।
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