कुरान - 50:7 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَٱلۡأَرۡضَ مَدَدۡنَٰهَا وَأَلۡقَيۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجِۭ بَهِيجٖ

Transliteration: (Wal arda madadnaahaa wa alqainaa feehaa rawaasiya wa ambatnaa feehaa min kulli zawjim baheej)

और ज़मीन को हमने फैला दिया और उसमें मज़बूत पहाड़ रख दिए, और उसमें हर क़िस्म की ख़ुशनुमा (नबातात की) किस्में उगाईं; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 7

✅ ज़मीन, पहाड़ और नबातात की निशानियां

ज़मीन का फैलाव, ज़लज़लों से बचाने के लिए पहाड़ों का लंगर और तरह-तरह के रंग-बिरंगे नफ़ा-बख़्श फल-फूल अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत का इज़हार हैं।

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