कुरान - 50:6 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أَفَلَمۡ يَنظُرُوٓاْ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَوۡقَهُمۡ كَيۡفَ بَنَيۡنَٰهَا وَزَيَّنَّـٰهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٖ

Transliteration: (Afalam yanzurooo ilas samaaa'i fawqahum kaifa banainaahaa wa zaiyannaahaa wa maa lahaa min furooj)

तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आसमान की तरफ़ नहीं देखा कि हमने उसे कैसा बनाया और उसे कैसे संवारा, और उसमें कोई शिगाफ़ (दरार) नहीं है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 6

✅ आसमान की बे-ऐब तख़लीक़

अल्लाह तआला ने इंसानों को आसमान की बुलंदी, सितारों की ख़ूबसूरती और उसकी बे-ऐब तामीर पर ग़ौर करने की दावत दी जिसमें कोई सुराख़ या जोड़ नज़र नहीं आता।

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