कुरान - 50:4 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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قَدۡ عَلِمۡنَا مَا تَنقُصُ ٱلۡأَرۡضُ مِنۡهُمۡۖ وَعِندَنَا كِتَٰبٌ حَفِيظُۢ

Transliteration: (Qad 'alimnaa maa tanqu-sul-ardu minhum wa 'indanaa Kitaabun Hafeez)

बेशक हम जानते हैं जो कुछ ज़मीन उनके (जिस्मों) में से खाती (कम करती) है, और हमारे पास महफ़ूज़ रखने वाली किताब (लौहे महफ़ूज़) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 4

✅ इल्मे इलाही और लौहे महफ़ूज़

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इंसान का जो ज़र्रा भी सड़-गलकर ज़मीन में मिलता है, अल्लाह के इल्म में उसका एक-एक जर्रा महफ़ूज़ है और सब कुछ लौहे महफ़ूज़ में दर्ज है।

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