कुरान - 50:3 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗاۖ ذَٰلِكَ رَجۡعُۢ بَعِيدٞ

Transliteration: ('A-izaa mitnaa wa kunnaa turaaban zaalika raj'um ba'eed)

'क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी हो जाएंगे (तो दोबारा ज़िंदा किए जाएंगे)? यह पलटना तो अक़्ल से बहुत दूर है!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 3

✅ दोबारा ज़िंदा किए जाने पर मुनकिरीन का शक

काफ़िरों का सबसे बड़ा इनकार मरने के बाद दोबारा उठाए जाने (बाअस बादलमौत) पर था; वे कहते थे कि ख़ाक में मिल जाने के बाद दोबारा ज़िंदा होना नामुमकिन है।

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