कुरान - 50:34 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
ٱدۡخُلُوهَا بِسَلَٰمٖۖ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡخُلُودِ

Transliteration: (Udkhuloohaa bisalaamin zaalika yawmul khulood)

'इसमें सलामती के साथ दाख़िल हो जाओ; यही हमेशा रहने का दिन है!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 34

✅ यौमुल ख़ुलूद (हमेशा की ज़िंदगी)

जन्नतियों का इस्तक़बाल सलामती और अमन के पैग़ाम के साथ किया जाएगा और फ़रमाया जाएगा कि अब यह ऐसी नेअमत है जो कभी ख़त्म नहीं होगी।

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