Transliteration: (Kazzabat qablahum qawmu Noohinw wa 'Aadunw wa Fir'awnu zul awtaad)
"उनसे पहले नूह की क़ौम [19], और आद [20], और मेखों वाले (ज़ालिम) फ़िरऔन [21] ने भी झुटलाया था,"
क़ौमे नूह ने 950 साल की मुसलसल तब्लीग़ के बावजूद सरकशी और तकज़ीब का रास्ता अपनाया और तूफ़ान में ग़र्क़ कर दी गई।
हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम आद अपनी जिस्मानी ताक़त पर नाज़ करती थी, मगर तेज़ हवा के अज़ाब ने उन्हें तबाह कर दिया।
फ़िरऔन अपने मुख़ालिफ़ीन के हाथ-पाँव में चारों तरफ़ मेखें ठोंक कर धूप में तड़पा-तड़पा कर मारता था। हज़रत आसिया (रदियल्लाहु अन्हा) पर भी उसने यही ज़ुल्म किया, मगर आख़िरकार समंदर में ग़र्क़ होकर ज़िल्लत की मौत मरा।
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