कुरान - 38:12 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ وَعَادٞ وَفِرۡعَوۡنُ ذُو ٱلۡأَوۡتَادِ

Transliteration: (Kazzabat qablahum qawmu Noohinw wa 'Aadunw wa Fir'awnu zul awtaad)

उनसे पहले नूह की क़ौम [19], और आद [20], और मेखों वाले (ज़ालिम) फ़िरऔन [21] ने भी झुटलाया था, (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 12

"उनसे पहले नूह की क़ौम [19], और आद [20], और मेखों वाले (ज़ालिम) फ़िरऔन [21] ने भी झुटलाया था,"

[19] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम

क़ौमे नूह ने 950 साल की मुसलसल तब्लीग़ के बावजूद सरकशी और तकज़ीब का रास्ता अपनाया और तूफ़ान में ग़र्क़ कर दी गई।

[20] क़ौमे आद की नाफ़रमानी

हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम आद अपनी जिस्मानी ताक़त पर नाज़ करती थी, मगर तेज़ हवा के अज़ाब ने उन्हें तबाह कर दिया।

[21] फ़िरऔन की मेखें और ज़ुल्म

फ़िरऔन अपने मुख़ालिफ़ीन के हाथ-पाँव में चारों तरफ़ मेखें ठोंक कर धूप में तड़पा-तड़पा कर मारता था। हज़रत आसिया (रदियल्लाहु अन्हा) पर भी उसने यही ज़ुल्म किया, मगर आख़िरकार समंदर में ग़र्क़ होकर ज़िल्लत की मौत मरा।

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