कुरान - 38:13 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَثَمُودُ وَقَوۡمُ لُوطٖ وَأَصۡحَٰبُ لۡـَٔيۡكَةِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلۡأَحۡزَابُ

Transliteration: (Wa Samoodu wa qawmu Lootinw wa Ashaabul 'Aykah; ulaaa'ikal Ahzaab)

और समूद, और लूत की क़ौम, और बनवासी (ऐका वाले) [22]; ये सब वही (मुत्तहिद) लश्कर थे [23]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 13

"और समूद, और लूत की क़ौम, और बनवासी (ऐका वाले) [22]; ये सब वही (मुत्तहिद) लश्कर थे [23]!"

[22] असहाबुल ऐका (जंगल वाले)

"ऐका वाले" हज़रत शुऐब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम थी जो घने जंगलों में रहती थी और नाप-तौल में कमी और फ़साद की आदी थी।

[23] कुफ़्र के मुत्तहिद लश्कर

ये तमाम क़ौमें हक़ के मुक़ाबले में मुत्तहिद थीं, मगर जिस तरह तारीकी कभी रौशनी पर ग़ालिब नहीं आ सकती, उसी तरह ये सब के सब तबाह कर दिए गए।

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