Transliteration: (Wa aakhareena muqarraneena fil asfaad)
"और दूसरों को ज़ंजीरों में जकड़े हुए [80]!"
जो जिन्नात और शयातीन नाफ़रमानी या शरारत करते, उन्हें हज़रत सुलैमान के हुक्म से ज़ंजीरों और बेड़ियों में जकड़ दिया जाता था। इससे मालूम हुआ कि अल्लाह के मुक़र्रब बंदों का रोब व इख़्तियार शैतानी ताक़तों पर ग़ालिब रहता है।
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