Transliteration: (Haazaa 'ataaa'unaa famnun aw amsik bighairi hisaab)
"यह हमारी अता है, अब तू चाहे किसी पर एहसान कर या रोक रख [81], कोई हिसाब नहीं [82]!"
अल्लाह तआला ने हज़रत सुलैमान को कामिल इख़्तियार बख़्शा कि जिसे चाहो अता करो और जिसे चाहो न दो। अल्लाह के महबूब बंदे ख़ज़ाइन-ए-इलाही के क़ासिम और मुख़्तार होते हैं।
अल्लाह ने फ़रमाया कि आपकी इस तक़सीम पर कोई मुहासिबा नहीं होगा क्योंकि आपका हर अमल रज़ा-ए-इलाही और हिकमत के मुताबिक़ है।
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