कुरान - 38:39 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
هَٰذَا عَطَآؤُنَا فَٱمۡنُنۡ أَوۡ أَمۡسِكۡ بِغَيۡرِ حِسَابٖ

Transliteration: (Haazaa 'ataaa'unaa famnun aw amsik bighairi hisaab)

यह हमारी अता है, अब तू चाहे किसी पर एहसान कर या रोक रख [81], कोई हिसाब नहीं [82]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 39

"यह हमारी अता है, अब तू चाहे किसी पर एहसान कर या रोक रख [81], कोई हिसाब नहीं [82]!"

[81] नेअमतों की तक़सीम का इख़्तियार

अल्लाह तआला ने हज़रत सुलैमान को कामिल इख़्तियार बख़्शा कि जिसे चाहो अता करो और जिसे चाहो न दो। अल्लाह के महबूब बंदे ख़ज़ाइन-ए-इलाही के क़ासिम और मुख़्तार होते हैं।

[82] महबूब बंदों पर कोई हिसाब नहीं

अल्लाह ने फ़रमाया कि आपकी इस तक़सीम पर कोई मुहासिबा नहीं होगा क्योंकि आपका हर अमल रज़ा-ए-इलाही और हिकमत के मुताबिक़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now