कुरान - 12:62 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
وَقَالَ لِفِتۡيَٰنِهِ ٱجۡعَلُواْ بِضَٰعَتَهُمۡ فِي رِحَالِهِمۡ لَعَلَّهُمۡ يَعۡرِفُونَهَآ إِذَا ٱنقَلَبُوٓاْ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِمۡ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa qaala lifityaanihij 'aloo bidaa'atahum fee rihaalihim la'allahum ya'rifoonahaaa izan qalabooo ilaaa ahlihim la'allahum yarji'oon)

और यूसुफ़ ने अपने कर्मचारियों से कहा, "इनका (अनाज खरीदने का) धन-माल (पूंजी) इनकी बोरियों में ही रख दो, ताकि जब वे अपने घर लौटें तो उसे पहचान लें, शायद वे (उसे लौटाने और दोबारा अनाज लेने) लौट आएं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 62 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत यूसुफ़ की उदारता और गुप्त योजना

हज़रत यूसुफ़ ने अपने पिता और भाइयों से पैसे लेना गवारा न समझा। साथ ही उन्हें मालूम था कि उनके पिता हज़रत याक़ूब नबी हैं और अमानतदार हैं, जब वे देखेंगे कि पैसे वापस आ गए हैं तो वे अवश्य अपने बेटों को यह रक़म लौटाने और दूसरा अनाज लेने दोबारा मिस्र भेजेंगे।

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