कुरान - 12:64 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
قَالَ هَلۡ ءَامَنُكُمۡ عَلَيۡهِ إِلَّا كَمَآ أَمِنتُكُمۡ عَلَىٰٓ أَخِيهِ مِن قَبۡلُ فَٱللَّهُ خَيۡرٌ حَٰفِظٗاۖ وَهُوَ أَرۡحَمُ ٱلرَّـٰحِمِينَ

Transliteration: (Qaala hal aamanukum 'alaihi illaa kamaa amintukum 'alaaa akheehi min qabl; fal laahu khairun haafizanw wa Huwa arhamur Raahimeen)

याक़ूब ने कहा, "क्या मैं इसके मामले में तुम पर वैसा ही भरोसा करूँ जैसा इससे पहले इसके भाई (यूसुफ़) के मामले में तुम पर भरोसा किया था? तो अल्लाह ही सबसे उत्तम रक्षक (हिफ़ाज़त करने वाला) है, और वह सब दया करने वालों से बढ़कर दयालु है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 64 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "فَاللَّهُ خَيْرٌ حَافِظًا وَهُوَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ" – सर्वश्रेष्ठ रक्षक केवल अल्लाह है

हज़रत याक़ूब ने भाइयों के पुराने धोखे (यूसुफ़ के वाक़िए) की याद दिलाई। लेकिन भुखमरी की विवशता में उन्होंने अपने बेटे की रक्षा का मामला इंसानों के बजाय केवल अल्लाह तआला के सुपुर्द कर दिया। यह आयत हर प्रकार की सुरक्षा और ख़तरे में अल्लाह पर तवक्कुल की सर्वश्रेष्ठ क़ुरआनी दुआ है।

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