कुरान - 12:66 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
قَالَ لَنۡ أُرۡسِلَهُۥ مَعَكُمۡ حَتَّىٰ تُؤۡتُونِ مَوۡثِقٗا مِّنَ ٱللَّهِ لَتَأۡتُنَّنِي بِهِۦٓ إِلَّآ أَن يُحَاطَ بِكُمۡۖ فَلَمَّآ ءَاتَوۡهُ مَوۡثِقَهُمۡ قَالَ ٱللَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٞ

Transliteration: (Qaala lan ursilahoo ma'akum hattaa tu'tooni mawsiqam minal laahee lataa tunnanee biheee illaaa ai yuhaata bikum falammaaa aatawhu mawsiqahum qaalal laahu 'alaa maa naqoolu Wakeel)

याक़ूब ने कहा, "मैं इसे तुम्हारे साथ कदापि नहीं भेजूँगा जब तक कि तुम अल्लाह की क़सम खाकर मुझे पक्का वचन न दे दो कि तुम इसे मेरे पास अवश्य वापस लाओगे, सिवाय इसके कि तुम सब के सब घेर लिए जाओ (बेबस कर दिए जाओ);" फिर जब उन्होंने अपना पक्का वचन दे दिया, तो याक़ूब ने कहा, "जो कुछ हम कह रहे हैं उस पर अल्लाह गवाह और संरक्षक है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 66 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह के नाम पर पक्का अहद (वचन)

हज़रत याक़ूब ने अत्यंत सख़्त शर्त रखी कि अल्लाह को हाज़िर-नाज़िर जानकर क़सम खाओ कि अगर सब के सब मारे न जाओ तो बिन्यामीन को सुरक्षित वापस लाओगे। भाइयों ने यह गंभीर शपथ ली।

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