कुरान - 12:67 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
وَقَالَ يَٰبَنِيَّ لَا تَدۡخُلُواْ مِنۢ بَابٖ وَٰحِدٖ وَٱدۡخُلُواْ مِنۡ أَبۡوَٰبٖ مُّتَفَرِّقَةٖۖ وَمَآ أُغۡنِي عَنكُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٍۖ إِنِ ٱلۡحُكۡمُ إِلَّا لِلَّهِۖ عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُۖ وَعَلَيۡهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُتَوَكِّلُونَ

Transliteration: (Wa qaala yaa baniyya laa tadkhuloo mim baabinw waa hidinw wadkhuloo min abwaabim mutafarriqah; wa maaa ughnee 'ankum minal laahi min shai'in; inil hukmu illaa lillaahi 'alaihi tawakkaltu wa 'alaihi fal yatawakkalil Mutawakkiloon)

और उन्होंने कहा, "ऐ मेरे बेटो! तुम सब एक ही दरवाज़े से (शहर में) प्रवेश न करना, बल्कि अलग-अलग दरवाज़ों से दाख़िल होना; और मैं अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकता; हुक्म तो केवल अल्लाह ही का है; उसी पर मैंने भरोसा किया और भरोसा करने वालों को उसी पर भरोसा करना चाहिए।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 67 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नज़र-ए-बद से बचाव और अलग-अलग दरवाज़ों से दाख़िला

हज़रत याक़ूब के ग्यारह बेटे अत्यंत सुंदर, स्वस्थ और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले थे। एक साथ एक ही दरवाज़े से दाख़िल होने पर लोगों की बुरी नज़र (नज़र-ए-बद) लगने या जासूस समझे जाने का ख़तरा था। हज़रत याक़ूब ने सावधानी के तौर पर अलग-अलग दरवाज़ों से जाने की सलाह दी।

✅ [2] तदबीर और तवक्कुल का संतुलन

हज़रत याक़ूब ने स्पष्ट किया कि सावधानी बरतना इंसान का कर्तव्य है, लेकिन कोई सावधानी अल्लाह की तक़दीर को नहीं बदल सकती। अंतिम भरोसा केवल अल्लाह पर ही होना चाहिए।

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