कुरान - 12:69 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
وَلَمَّا دَخَلُواْ عَلَىٰ يُوسُفَ ءَاوَىٰٓ إِلَيۡهِ أَخَاهُۖ قَالَ إِنِّيٓ أَنَا۠ أَخُوكَ فَلَا تَبۡتَئِسۡ بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa lammaa dakhaloo 'alaa Yoosufa aawaaa ilaihi akhaahu qaala inneee ana akhooka falaa tabta'is bimaa kaanoo ya'maloon)

और जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो यूसुफ़ ने अपने (सगे) भाई को अपने पास जगह दी (और तन्हाई में) कहा, "निस्संदेह, मैं ही तुम्हारा भाई (यूसुफ़) हूँ; अतः जो कुछ वे करते रहे हैं उस पर दुखी न होना!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 69 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दो बिछड़े भाइयों का भावुक मिलन

हज़रत यूसुफ़ ने भोजन के समय दो-दो भाइयों की जोड़ी बनाई और अकेले बचे बिन्यामीन को अपने पास बिठाया। एकांत पाते ही यूसुफ़ ने गले लगकर अपना भेद खोल दिया कि मैं तुम्हारा वही खोया हुआ भाई यूसुफ़ हूँ। उन्होंने बिन्यामीन को ढांढस बंधाया कि भाइयों के पुराने ज़ुल्म पर अब ग़म न करो, अल्लाह ने हमें मिला दिया है।

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