Transliteration: (Salaamun qawlam mir Rabbir Raheem)
"'सलाम' — निहायत रहम फ़रमाने वाले रब की तरफ़ से फ़रमाया हुआ सलाम होगा [89]!"
अल्लाह तआला ख़ुद बिला-वास्ता या फ़रिश्तों के ज़रिए अहले जन्नत को "सलाम" फ़रमाएगा। यह सलाम किसी दुआ के तौर पर नहीं (क्योंकि अल्लाह दुआ मांगने से पाक है), बल्कि रज़ा-ए-इलाही और अहले जन्नत के अज़ीम मर्तबे के इज़हार के लिए है। इस सलाम के साथ ही दीदारे इलाही की अज़ीम नेमत से मोमिनों की आंखें ठंडी होंगी।
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