Transliteration: (Alam a'had ilaikum yaa Baneee Aadama al-laa ta'budush Shaitaana innahoo lakum 'aduwwum mubeen)
"ऐ औलादे आदम! क्या मैंने तुमसे अहद न लिया था [91] कि शैतान की पूजा न करना? बेशक वह तुम्हारा खुला दुश्मन है [92]!"
अल्लाह तआला ने रोज़े अज़ल रूहों से अहद लिया था और फिर अम्बिया-ए-किराम और आसमानी किताबों के ज़रिए बार-बार याद दिलाया कि शैतान की इताअत न करना। शैतान की बात मानना और गुनाह करना दरअस्ल शैतान की परस्तिश ही है।
शैतान इंसान का पुराना, एलानिया और खुला दुश्मन है जिसने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) के वक़्त से ही इंसानियत को गुमराह करने की क़सम खाई थी। इसके बावजूद इंसानों ने नाफ़रमानी की और ख़ुद को हलाकत में डाला।
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