कुरान - 36:60 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
۞أَلَمۡ أَعۡهَدۡ إِلَيۡكُمۡ يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ أَن لَّا تَعۡبُدُواْ ٱلشَّيۡطَٰنَۖ إِنَّهُۥ لَكُمۡ عَدُوّٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Alam a'had ilaikum yaa Baneee Aadama al-laa ta'budush Shaitaana innahoo lakum 'aduwwum mubeen)

ऐ औलादे आदम! क्या मैंने तुमसे अहद (वादा) न लिया था [91] कि शैतान की पूजा (पैरवी) न करना? बेशक वह तुम्हारा खुला दुश्मन है [92]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 60

"ऐ औलादे आदम! क्या मैंने तुमसे अहद न लिया था [91] कि शैतान की पूजा न करना? बेशक वह तुम्हारा खुला दुश्मन है [92]!"

[91] अहदे अज़ल और अम्बिया की तालीमात

अल्लाह तआला ने रोज़े अज़ल रूहों से अहद लिया था और फिर अम्बिया-ए-किराम और आसमानी किताबों के ज़रिए बार-बार याद दिलाया कि शैतान की इताअत न करना। शैतान की बात मानना और गुनाह करना दरअस्ल शैतान की परस्तिश ही है।

[92] शैतान की खुली दुश्मनी

शैतान इंसान का पुराना, एलानिया और खुला दुश्मन है जिसने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) के वक़्त से ही इंसानियत को गुमराह करने की क़सम खाई थी। इसके बावजूद इंसानों ने नाफ़रमानी की और ख़ुद को हलाकत में डाला।

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