कुरान - 36:62 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
وَلَقَدۡ أَضَلَّ مِنكُمۡ جِبِلّٗا كَثِيرًاۖ أَفَلَمۡ تَكُونُواْ تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa laqad adalla minkum jibillan kaseeraa; afalam takoonoo ta'qiloon)

और बेशक उसने (शैतान ने) तुम में से बहुत बड़ी मख़्लूक़ (गिरोहों) को बहका दिया [93]; तो क्या तुम अक़्ल नहीं रखते थे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 62

"और बेशक उसने तुम में से बहुत बड़ी मख़्लूक़ को बहका दिया [93]; तो क्या तुम अक़्ल नहीं रखते थे?"

[93] शैतान की गुमराह करने की तारीख़ और इबरत

यह आयते करीमा पिछली क़ौमों की हलाकत की तरफ़ इशारा करती है कि शैतान ने पहली उम्मतों के लाखों-करोड़ों इंसानों को कुफ़्र और शिर्क में मुब्तला करके तबाह-ओ-बर्बाद कर दिया।

काफ़िरों को डांट-फटकार की जा रही है कि क्या तुम अपनी अक़्ल से काम नहीं लेते? जब तुम्हें मालूम है कि शैतान का रास्ता सिर्फ़ बर्बादी की तरफ़ ले जाता है, तो फिर तुमने उसकी पैरवी क्यों की?

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