कुरान - 10:67 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
هُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ لِتَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Huwal lazee ja'ala lakumul laila litaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; inna fee zaalika la Aayaatil li qawminy yasma'oon)

वही है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ताकि तुम उसमें सुकून (आराम) पाओ और दिन को देखने (रोशन) वाला बनाया। निस्संदेह, इसमें उन लोगों के लिए निशानियां हैं जो ध्यान से सुनते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 67 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रात का सुकून और दिन का उजाला

अल्लाह ने प्राकृतिक व्यवस्था इस प्रकार बनाई है कि रात को अंधेरा छा जाता है जिससे थके हुए शरीर और मस्तिष्क को शांति व विश्राम मिलता है, और दिन में सूरज की रोशनी फैल जाती है ताकि इंसान काम-काज और रोज़ी-रोटी की तलाश कर सके। यह अद्भुत संतुलन एक दयालु और सर्वज्ञ सृष्टा की गवाही देता है।

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