Transliteration: (Wattabi' maa yoohaaa ilaika wasbir hattaa yahkumal laah; wa Huwa khairul haakimeen)
सूरह यूनुस का अंत दो सुनहरे सिद्धांतों पर होता है:
1. किताब व सुन्नत की पैरवी: अल्लाह की भेजी हुई वह्य पर निष्ठापूर्वक अमल करना।
2. सब्र और धैर्य: विरोधियों की धमकियों और मुश्किलों के मुक़ाबले में धैर्य रखना।
अल्लाह ही सर्वोत्तम न्यायधीश है, जो बहुत जल्द सत्य को विजयी और असत्य को पराजित करेगा।
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