कुरान - 10:107 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
وَإِن يَمۡسَسۡكَ ٱللَّهُ بِضُرّٖ فَلَا كَاشِفَ لَهُۥٓ إِلَّا هُوَۖ وَإِن يُرِدۡكَ بِخَيۡرٖ فَلَا رَآدَّ لِفَضۡلِهِۦۚ يُصِيبُ بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Wa iny yamsaskal laahu bidurrin falaa kaashifa lahoo illaa hoo;wa iny yuridka bikhairin falaa raaadda lifadlih; yuseebu bihee many yashaaa'u min 'ibaadih; wa huwal Ghafoorur Raheem)

और यदि अल्लाह आपको किसी तकलीफ़ में डाले, तो उसके सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं; और यदि वह आपके साथ किसी भलाई का इरादा करे, तो कोई उसके फ़ज़ल को रोकने वाला नहीं। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है अपना फ़ज़ल पहुँचाता है; और वही बहुत क्षमाशील (ग़फ़ूर), अत्यंत दयालु (रहीम) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 107 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नफ़ा और नुक़सान का अकेला मालिक: अल्लाह तआला

यह आयत तौहीद का निचोड़ और मोमिन के दिल को अटूट शांति देने वाली है। यदि पूरी दुनिया मिलकर भी किसी को नुक़सान पहुँचाना चाहे तो अल्लाह की मर्ज़ी के बिना एक खरोंच भी नहीं ला सकती; और यदि अल्लाह किसी को नेमत, इज़्ज़त या सेहत देना चाहे, तो पूरी कायनात मिलकर भी उसे रोक नहीं सकती। सारा भरोसा केवल अल्लाह पर होना चाहिए।

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