कुरान - 10:103 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيۡنَا نُنجِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Thumma nunajjee Rusulana wallazeena aamanoo; kazaalika haqqan 'alainaa nunjil mu'mineen)

फिर हम अपने रसूलों को और उन लोगों को जो ईमान लाए, बचा लेते हैं; इसी प्रकार हमारे ज़िम्मे यह हक़ (लाज़िम) है कि हम ईमान वालों को बचा लें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 103 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ईमान वालों की सुरक्षा का ईश्वरीय वादा

अल्लाह तआला ने अपने करम और रहमत से यह नियम अपने ऊपर अनिवार्य कर रखा है कि जब भी किसी क़ौम पर अज़ाब आता है, तो वह अपने नबियों और सच्चे मोमिनों को सुरक्षित बचा लेता है। मोमिन कभी लावारिस नहीं होता।

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