कुरान - 10:65 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
وَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمۡۘ إِنَّ ٱلۡعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًاۚ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Wa laa yahzunka qawluhum; innal 'izzata lillaahi jamee'aa; Huwas Samee'ul 'Aleem)

और (ऐ पैग़म्बर!) उनकी बातें आपको दुखी न करें; निस्संदेह, सारी इज़्ज़त अल्लाह ही के लिए है; वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 65 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] विरोधियों की कटु बातों पर नबी ﷺ को सांत्वना

काफ़िरों के तानों, झूठे आरोपों और विरोध से रसूलुल्लाह ﷺ के दिल को जो ठेस पहुँचती थी, अल्लाह तआला ने उस पर सांत्वना दी कि इज़्ज़त और ज़िल्लत किसी विरोधी के हाथ में नहीं, बल्कि केवल अल्लाह के हाथ में है। अंततः इस्लाम और उसके पैग़म्बर को ही सर्वोच्च प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।

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