कुरान - 10:64 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
لَهُمُ ٱلۡبُشۡرَىٰ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ لَا تَبۡدِيلَ لِكَلِمَٰتِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

Transliteration: (Lahumul bushraa fil hayaatid dunyaa wa fil Aakhirah; laa tabdeela li kalimaatil laah; zaalika huwal fawzul 'azeem)

उनके लिए सांसारिक जीवन में भी ख़ुशख़बरी है और आख़िरत में भी। अल्लाह की बातों में कोई फेरबदल नहीं हो सकता। यही सबसे बड़ी सफलता (फ़ौज़-ए-अज़ीम) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 64 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दुनिया और आख़िरत की बशारत (ख़ुशख़बरी)

हदीस के अनुसार, दुनिया में ख़ुशख़बरी से मुराद सच्चे और पाकीज़ा ख़्वाब (रुया-ए-सालिहा) और लोगों के दिलों में उनके लिए इज़्ज़त व मोहब्बत है। और मौत के समय फ़रिश्ते जन्नत की बशारत देते हैं। आख़िरत में जन्नत और अल्लाह की रज़ा हमेशा के लिए उनकी होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now