कुरान - 10:71 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
۞وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ نُوحٍ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيۡكُم مَّقَامِي وَتَذۡكِيرِي بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَعَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡتُ فَأَجۡمِعُوٓاْ أَمۡرَكُمۡ وَشُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ لَا يَكُنۡ أَمۡرُكُمۡ عَلَيۡكُمۡ غُمَّةٗ ثُمَّ ٱقۡضُوٓاْ إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ

Transliteration: (Watlu 'alaihim naba-a-Noohin iz qaala liqawmihee yaa qawmi in kaana kabura 'alaikum maqaamee wa tazkeeree bi Aayaatil laahi fa'alal laahi tawakkaltu fa ajmi'ooo amrakum wa shurakaaa'akum thumma laa yakun amrukum 'alaikum ghummatan thummaq dooo ilaiya wa laa tunziroon)

और आप उन्हें नूह की घटना पढ़कर सुनाइए, जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी क़ौम! यदि मेरा तुम्हारे बीच ठहरना और अल्लाह की आयतों के ज़रिए तुम्हें समझाना तुम्हारे लिए भारी हो गया है, तो मेरा भरोसा केवल अल्लाह पर है! तुम सब मिलकर अपने ठहराए हुए साझीदारों के साथ अपनी योजना पक्की कर लो, फिर तुम्हारी योजना तुम पर संदेहास्पद न रहे; फिर मेरे ख़िलाफ़ जो फ़ैसला करना हो कर गुज़रो और मुझे तनिक भी मोहलत न दो!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 71 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का अदम्य तवक्कुल (भरोसा)

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने साढ़े नौ सौ वर्ष तक अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी। जब क़ौम ने उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं, तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने अकेले पूरी क़ौम और उनके तमाम बुतों को खुली चुनौती दे दी कि तुम सब मिलकर मेरे ख़िलाफ़ जो साज़िश करनी हो कर लो, मेरा रक्षक केवल अल्लाह तआला है। यह एक नबी के सच्चे ईमान और साहस का बेमिसाल उदाहरण है।

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