कुरान - 10:87 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَن تَبَوَّءَا لِقَوۡمِكُمَا بِمِصۡرَ بُيُوتٗا وَٱجۡعَلُواْ بُيُوتَكُمۡ قِبۡلَةٗ وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa awhainaaa ilaa Moosaa wa akheehi an tabaw wa aali qawmikuma bi Misra buyootanw waj'aloo buyootakum qiblatanw wa aqeemus Salaah; wa bashshiril mu'mineen)

और हमने मूसा और उनके भाई की ओर वह्य (प्रकाशना) भेजी कि "तुम दोनों मिस्र में अपनी क़ौम के लिए कुछ घर बनाओ और अपने घरों को इबादतगाह (क़िबला) ठहरा लो और नमाज़ क़ायम करो; और ईमान वालों को ख़ुशख़बरी दे दो।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 87 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] संकट के समय घरों को इबादतगाह बनाना

जब फ़िरऔन के ज़ुल्म के कारण बनी इसराईल के लिए खुले में नमाज़ पढ़ना और इबादत करना असंभव हो गया, तो अल्लाह ने हुक्म दिया कि अपने घरों को ही नमाज़ का केंद्र और इबादतगाह बना लो। संकट की घड़ी में नमाज़ और अल्लाह का ज़िक्र ही मोमिन का सबसे बड़ा संबल और रक्षा कवच होता है।

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