कुरान - 10:85 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
فَقَالُواْ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَا رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا فِتۡنَةٗ لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Faqaaloo 'alal laahi tawakkalnaa Rabbanaa laa taj'alnaa fitnatal lilqawmiz zaalimeen)

तो उन्होंने कहा, "हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया। ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के लिए आज़माइश का साधन न बना!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 85 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ईमान वालों की ऐतिहासिक दुआ

ईमान वालों ने पूर्ण तवक्कुल का इज़हार किया और दुआ मांगी कि ऐ रब! ज़ालिमों को हम पर हावी न होने दे, ऐसा न हो कि वे हमें प्रताड़ित करके हमारी परीक्षा लें या यह समझ बैठें कि यदि हम हक़ पर होते तो वे हम पर हावी न होते। यह दुआ हर पीड़ित मोमिन के लिए एक महान सहारा है।

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