कुरान - 10:83 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
فَمَآ ءَامَنَ لِمُوسَىٰٓ إِلَّا ذُرِّيَّةٞ مِّن قَوۡمِهِۦ عَلَىٰ خَوۡفٖ مِّن فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِمۡ أَن يَفۡتِنَهُمۡۚ وَإِنَّ فِرۡعَوۡنَ لَعَالٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

Transliteration: (Famaaa aamana li-Moosaaa illaa zurriyyatun min qawmihee 'alaa khawfin min Fir'awna wa mala'ihim 'any yaftinahum; wa inna Fir'awna la'aalin fil ardi wa innahoo laminal musrifeen)

फिर मूसा पर उनकी क़ौम के कुछ नौजवानों के सिवा कोई ईमान न लाया, फ़िरऔन और उसके सरदारों के इस डर से कि वह उन्हें सताएगा; और निस्संदेह, फ़िरऔन ज़मीन में बहुत निरंकुश (ज़ालिम) था और बेशक वह हद से गुज़रने वालों में से था। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 83 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] फ़िरऔनी अत्याचार और नौजवानों का साहस

फ़िरऔन की भयंकर क्रूरता और हत्याओं के डर से बनी इसराईल के बड़े लोग खुलकर सामने आने से डरते रहे, लेकिन कुछ साहसी नौजवानों ने जान की परवाह किए बिना हज़रत मूसा पर ईमान लाया। यह दर्शाता है कि सत्य की तहरीकों में युवा वर्ग का त्याग हमेशा अग्रणी रहता है।

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