कुरान - 93:6 सूरह अद-दुहा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
أَلَمۡ يَجِدۡكَ يَتِيمٗا فَـَٔاوَىٰ

Transliteration: (Alam ya jidka yateeman fa aawaa )

6. क्या उसने आपको (ओ मुहम्मद) यतीम नहीं पाया, फिर उसने आपको सहारा दिया? [6] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुहा आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

क्या उसने आपको (हे मुहम्मद ﷺ) यतीम नहीं पाया, फिर उसने आपको आसरा दिया?  की तफसीर (Tafseer (Commentary) of the Verse Did He not find you (O Muhammad ﷺ) an orphan, so He gave you shelter)

नबी ﷺ की यतीम होने का पस-ए-मंज़र (The Background of the Prophet's ﷺ Orphanhood)

जब हज़रत मुहम्मद ﷺ अपनी माँ के पेट में महज़ दो महीने के थे, तो उनके पिता, हज़रत अब्दुल्लाह, मदीना शरीफ में उनका इंतकाल हो गया।
हज़रत अब्दुल्लाह ने नबी ﷺ के लिए कोई संपत्ति, घर, या धन नहीं छोड़ा।
नबी ﷺ की परवरिश उनके दादा, हज़रत अब्दुल मuttalib, और माँ, बीबी आमिना ने की।
चार या छह साल की उम्र में, उनकी माँ का इंतकाल अबवा नामक स्थान पर हुआ।
आठ साल की उम्र में, उनके दादा, हज़रत अब्दुल मuttalib, का भी इंतकाल हो गया।

नबी ﷺ की परवरिश में हज़रत अबू तालिब की भूमिका (The Role of Hazrat Abu Talib in the Prophet's Upbringing)

अपने इंतकाल से पहले, हज़रत अब्दुल मuttalib ने नबी ﷺ की देखभाल का जिम्मा अपने बेटे, हज़रत अबू तालिब, जो नबी ﷺ के प्यारे चाचा थे, को सौंप दिया।
हज़रत अबू तालिब ने नबी ﷺ की बेइंतहा मोहब्बत और सुरक्षा के साथ देखभाल की और उन्हें बखूबी पाला।

आयत की व्याख्या (Explanation of the Verse)

अल्लाह की देखभाल हज़रत अब्दुल मuttalib और हज़रत अबू तालिब के माध्यम से (Divine Care Through Abdul Muttalib and Abu Talib)

यह आयत इस बात को ज़ोर देती है कि नबी ﷺ के लिए जो गहरी मोहब्बत हज़रत अब्दुल मuttalib और हज़रत अबू तालिब के दिलों में डाली गई, वह असल में अल्लाह की योजना और रहमत का एक रूप थी।
उनकी देखभाल और सुरक्षा दरअसल अल्लाह की दिव्य योजना का प्रतिबिंब थी।

अल्लाह की नजदीकी और देखभाल का प्रतीक (The symbolism of Divine Proximity and Care)

अल्लाह ने नबी ﷺ को एक बेमिसाल और अद्वितीय मोती की तरह माना।
यद्यपि वह यतीम थे, अल्लाह ने नबी ﷺ को एक विशेष नजदीकी का स्थान दिया और उन्हें उनके दुश्मनों के बीच में भी सुरक्षा प्रदान की।

नबूवत का तोहफा और अल्लाह की नजदीकी (Bestowal of Prophethood and Divine Closeness)

अल्लाह ने नबी ﷺ को नबूवत का तोहफा दिया और उन्हें एक ऐसी मक़ाम पर पहुँचाया, जो अनमोल और बेमिसाल था।

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