Transliteration: (Wad duhaa )
कुछ दिनों तक वह़ी (क़ुरान का नाज़िल होना) का सिलसिला रुक गया था। इस पर कुछ बदनीयत काफिरों ने कहा कि अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद (ﷺ) को छोड़ दिया है और नापसंद कर लिया है। इन काफिरों के जवाब में ये सूरह नाज़िल हुई (तफ़सीर खज़ाइनुल इरफान, रूहुल म’ानी वगैरह)।
सूरह अल-लैल में हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (رضي الله عنه) पर की गई तानों का जवाब दिया गया, और इस सूरह में नबी करीम (ﷺ) पर की गई तानों का जवाब दिया गया।
खुलासा ये है कि सूरह अल-लैल को "सिद्दीक़ी सूरह" कहा गया, जबकि इस सूरह को "मुहम्मदी सूरह" कहा गया (तफ़सीर अज़ीज़ी)।
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