कुरान - 93:3 सूरह अद-दुहा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ

Transliteration: (Ma wad da'aka rabbuka wa ma qalaa)

3. तुम्हारे रब ने तुम्हें छोड़ नहीं दिया[2], और न ही वह तुमसे नाराज़ हैं। [3] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुहा आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

"तुम्हारे रब ने तुम्हें नहीं छोड़ा और न ही वह तुमसे नाखुश हैं (Tafseer Commentary of the Ayat "Your Lord has not forsaken you, nor is displeased with you")

2. "तुम्हें नहीं छोड़ा" की व्याख्या (Explanation of "Your Lord has not forsaken you")

"तुम्हें नहीं छोड़ा" का वाक्य अतीत के अनिश्चित काल (Past Indefinite Tense) में है, जिसका मतलब है कि पिछले समय में हमेशा अल्लाह तआला की रहमत का रिश्ता नबी ﷺ के साथ था।

इससे दो मुद्दे निकलते हैं (Two Issues Emerge From This):

नबी ﷺ का पहले से नबी होना (The Holy Prophet ﷺ was a Prophet even before his advent into the world):
हालाँकि नबुवत दुनिया में चालीस साल की उम्र में प्रकट हुई, लेकिन हज़रत मुहम्मद ﷺ पहले से ही नबी थे, जो कि उनकी शारीरिक उपस्थिति से पहले था।

नबी ﷺ का दिव्य कनेक्शन और शक्तियाँ (The Divine Connection and Powers of the Holy Prophet ﷺ):
नबी ﷺ में दिव्य शक्तियाँ हैं क्योंकि वह हमेशा अल्लाह तआला से जुड़े रहते हैं, जैसे एक मशीन हमेशा विद्युत स्रोत से जुड़ी रहती है।
जैसे विद्युत धारा मशीन में बहती है, वैसे ही नबी ﷺ के माध्यम से अल्लाह की ज्ञान और शक्ति निरंतर प्रवाहित होती रहती है।
कई कुरआनी आयतें और हदीस इस बात की पुष्टि करती हैं।

सूफी व्याख्या (Sufi Explanation):

सूफी संत नबी ﷺ के कनेक्शन को अल्लाह तआला से एक दीपक की रोशनी से जोड़ते हैं, जो बिजली के संयंत्र से जुड़ी होती है।
जहां भी दीपक की रोशनी पड़ती है, चिमनी का रंग भी वही होता है।
इसी तरह, जो भी नबी ﷺ से जुड़ा होता है, वह अल्लाह तआला से जुड़ा होता है।
वहीं, जो नबी ﷺ से खुद को अलग करता है, वह अल्लाह तआला से भी अलग हो जाता है।

3. "न ही वह तुमसे नाखुश हैं" की व्याख्या (Explanation of "nor is displeased with you")

अल्लाह तआला कभी भी नबी ﷺ से नाखुश नहीं हुए हैं:
यह पुष्टि करता है कि नबी ﷺ ने कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जो अल्लाह तआला को नापसंद हो।

नबियों की गलतियाँ (The Nature of Prophets' Errors):

नबियों की जो भी गलतियाँ होती हैं, वे असल में अल्लाह तआला की ओर से एक कृपा होती हैं।
अल्लाह तआला का कोई भी तलब (reprimand) एक प्रेम का कार्य होता है, गुस्से का नहीं।

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