कुरान - 93:4 सूरह अद-दुहा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَلَلۡأٓخِرَةُ خَيۡرٞ لَّكَ مِنَ ٱلۡأُولَىٰ

Transliteration: (Walal-aakhiratu khairul laka minal-oola)

4. और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है। [4] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुहा आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

आख़िरत तुम्हारे लिए बेहतर है दुनिया से (Tafseer (Commentary) of the Verse "And the Hereafter is better for you than the preceding one")

"आख़िरत तुम्हारे लिए पहले से बेहतर है" की व्याख्या (Explanation of "The Hereafter is better for you than the preceding one")

बारज़ख (दुनिया और क़ियामत के बीच की ज़िंदगी) में हज़रत मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी दुनिया से बेहतर है। बारज़ख में, नबी ﷺ हमेशा अल्लाह तआला से जुड़े रहते हैं और अपने रब से संवाद (मीराज) करते रहते हैं। यह हयातुन नबी (नबी ﷺ की शाश्वत ज़िंदगी) के सिद्धांत को साबित करता है।

नबी ﷺ की शाश्वत ज़िंदगी की प्रकृति (The Nature of the Holy Prophet’s ﷺ Eternal Life)

हज़रत मुहम्मद ﷺ की रूह बारज़ख में निवास करती है, जहाँ वह अल्लाह तआला से सबसे पवित्र संबंध का आनंद लेते हैं।
उनका पाक शरीर और मुबारक क़ब्र न सिर्फ़ अर्श (अल्लाह का सिंहासन) से भी अधिक पवित्र हैं, बल्कि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।

आख़िरत की श्रेष्ठता (The Superiority of the Hereafter)

आख़िरत की ज़िंदगी, जो क़ियामत के दिन के बाद शुरू होगी, नबी ﷺ की दुनिया की ज़िंदगी से अधिक श्रेष्ठ है।
दुनिया की ज़िंदगी में नबी ﷺ का दर्जा उनके शब्दों के माध्यम से प्रकट होता है, जबकि आख़िरत में, उनका दर्जा भव्य परिस्थितियों के माध्यम से प्रकट होगा, जिन्हें कोई भी नकार नहीं सकेगा।

हज़रत यूसुफ़ (उन पर सलाम) से तुलना (Comparison with Hazrat Yusuf (On whom be peace))

हज़रत यूसुफ़ ﷺ की महानता मिस्र में पहचानी गई, लेकिन हज़रत मुहम्मद ﷺ की महानता क़ियामत के दिन प्रकट होगी।
उस दिन, हज़रत मुहम्मद ﷺ को ऊँचे दर्जे दिए जाएंगे, जैसे कि उनकी बड़ी सिफारिश, सभी नबियों के पक्ष में उनकी गवाही, कुएं कौसर का पानी, और शफाअत की अनुमति।

हर पल नबी ﷺ की ऊँचाई (The Elevation of the Holy Prophet ﷺ at Every Moment)

हर नया पल पहले से अधिक श्रेष्ठ है, क्योंकि हर पल के साथ नबी ﷺ का दर्जा और भी ऊँचा होता है, और उनकी रौशनी हमेशा उच्चतम स्थान पर रहती है।

नबी ﷺ की शफाअत का असर (The Impact of the Prophet’s ﷺ Intercession)

यह आयत यह भी मानी जा सकती है कि नबी ﷺ की शफाअत और उनके माध्यम से, लोगों के लिए आख़िरत की ज़िंदगी उनकी दुनिया की ज़िंदगी से बेहतर होगी।
जो लोग नबी ﷺ से अपना संबंध तोड़ लेंगे, उन्हें आख़िरत में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।

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