Transliteration: (Wa amma bi ni'mati rabbika fahad dith )
अल्लाह तआला मोमिनों, विशेष रूप से अपने प्यारे नबी ﷺ से, उन नेमतों का आभार व्यक्त करने का आदेश देते हैं जो उन्होंने दी हैं। इस आभार को तीन प्रमुख तरीकों से व्यक्त किया जाना चाहिए:
1. आभार अत्यंत आवश्यक है (Gratitude is Essential)
अल्लाह की नेमतों का आभार व्यक्त करना केवल व्यक्तिगत इबादत का कार्य नहीं है, बल्कि यह आस्था को सुदृढ़ करने और दूसरों के बीच अल्लाह की पहचान और कृपा को फैलाने का एक साधन है।
आभार व्यक्त करने से मोमिन दूसरों के लिए उदाहरण बनते हैं, जिससे वे भी अल्लाह की नेमतों को पहचानने और उसकी कद्र करने के लिए प्रेरित होते हैं।
2. इस्लामी रूप-रंग और चरित्र अपनाना (Adopting Islamic Appearance and Character)
मोमिनों को इस्लाम की नेमतों को अपने बाहरी रूप और आंतरिक चरित्र में दोनों में दर्शाना चाहिए।
इस्लामी रूप और आचरण अल्लाह की नेमतों के प्रतीक होते हैं और इनका दूसरों से अलग दिखना चाहिए। जैसे मस्जिदें मंदिरों और चर्चों से पवित्रता में श्रेष्ठ हैं, वैसे ही मस्जिदों में जाने वाले लोगों को भी उच्च आचार और व्यवहार प्रदर्शित करना चाहिए।
3. अल्लाह की नेमतों को साझा करना (Sharing the Bounties of Allah)
अल्लाह की नेमतों का प्रचार करना केवल आत्मप्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को प्रेरित करने और उनके अल्लाह से संबंध को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से होना चाहिए।
उदाहरण स्वरूप:
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