कुरान - 93:2 सूरह अद-दुहा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَٱلَّيۡلِ إِذَا سَجَىٰ

Transliteration: (Wal laili iza sajaa )

2.और क़सम है रात की, जब वह छा जाए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुहा आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

चाश्त और रात की तफसीर (Tafseer Commentary of the Ayat "And by the night when it is dark")

सामान्य व्याख्या (General Interpretation)

शब्द "चाश्त" (मध्यान्ह) सामान्य रूप से मध्य प्रात: का समय है, और "रात जब यह छा जाती है" का मतलब रात के आखिरी हिस्से से है। ये समय बहुत अहम हैं क्योंकि चाश्त और तहज्जुद की नमाज इन घंटों में अदा की जाती है।

इन समयों में कुछ अहम घटनाएँ घटीं:

  • हज़रत मूसा (उन पर सलाम) की पहली तालीम।
  • जादूगरों पर जीत और फ़िरऔन से इस्राईलियों की मुक्ति।
  • हज़रत मुहम्मद ﷺ की नबुवत, जो चाश्त के समय हुई।
  • अल्लाह तआला का हज़रत मूसा (उन पर सलाम) से माउंट तूर पर बात करना।
  • हज़रत मुहम्मद ﷺ का मीराज (आसमानी यात्रा) रात के समय हुआ।

इसलिए, ये दो समय बेहद अहम हैं और इन पर क़स्म खाने के लायक हैं।

प्रतीकात्मक व्याख्याएँ (Symbolic Interpretations)

चाश्त को नबी ﷺ के पाक चेहरे के रूप में देखना (Chaasht as the Blessed Countenance of the Holy Prophet ﷺ):

चाश्त नबी ﷺ के दीप्तिमान और आकर्षक चेहरे का प्रतीक है, जिसने लोगों के दिलों को रोशन किया।
"रात जब यह छा जाती है" नबी ﷺ के स्याह, मीठी खुशबू वाले बालों का प्रतीक है, जिनके आशीर्वाद से पापी मु’मिनों के दोष ढक दिए जाते हैं।

चाश्त और रात को बाहरी घटनाएँ और गुप्त रहस्य के रूप में देखना (Chaasht as External Events and Night as Hidden Mysteries):

चाश्त नबी ﷺ से संबंधित बाहरी घटनाओं और घटनाओं का प्रतीक है, जो सभी को दिखाई देती थीं, जैसे कि चमकता हुआ सूरज।
"रात" नबी ﷺ के गुप्त और रहस्यमय घटनाओं का प्रतीक है, जिनका केवल अल्लाह तआला को ही ज्ञान है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवधियाँ (Historical and Spiritual Periods)

नबुवत का युग और इसके बाद का समय (The Era of Prophethood and the Period After):

चाश्त नबी ﷺ के उस समय का प्रतीक है जब नबुवत का सूरज उज्जवल रूप से चमक रहा था।
रात नबी ﷺ के बाद के समय का प्रतीक है। खुलफा-ए-राशिदीन के समय की रातें तारों से भरी और प्रकाशित थीं, लेकिन उनके बाद अंधेरी रातें आईं। इन अंधेरे समयों में, संतों और इस्लामी विद्वानों ने मार्गदर्शन का काम किया।

इस्लाम का उत्थान और पतन (The Rise and Decline of Islam):

चाश्त इस्लाम के उत्थान का प्रतीक है, जब वह महिमा की ऊंचाइयों तक पहुँचा।
रात मुसलमानों के पतन का प्रतीक है, जो क़ियामत के दिन के निकट है।

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