कुरान - 44:10 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
فَٱرۡتَقِبۡ يَوۡمَ تَأۡتِي ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Fartaqib Yawma ta'tis samaaa'u bi dukhaanin mubeen)

तो आप उस दिन का इंतिज़ार फ़रमाइए जब आसमान एक वाज़ेह धुआँ [8] लेकर आएगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 10

"तो आप उस दिन का इंतिज़ार फ़रमाइए जब आसमान एक वाज़ेह धुआँ [8] लेकर आएगा।"

[8] एक वाज़ेह निशानी और अज़ाब की वईद

यह आयत उन काफ़िरों को एक सख़्त चेतावनी देती है जो मुसलसल शक और ग़फ़लत में डूबे हुए हैं। इरशाद फ़रमाया गया “इंतिज़ार कीजिए”—यह महज़ मुंतज़िर रहने का हुक्म नहीं बल्कि एक इलाही चैलेंज है, जो एक मख़सूस अज़ाब और ज़ाहिर होने वाली निशानी की तरफ़ इशारा करता है।

“एक वाज़ेह धुआँ” (दुख़ान-ए-मुबीन) से एक ऐसा ज़ाहिरी अज़ाब मुराद है जो आसमान से छा जाएगा। मुफ़स्सिरीन की एक बड़ी जमाअत के नज़दीक यह वाक़िया हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के मुबारक ज़माने में पेश आया, जब मुशरिकीन-ए-मक्का पर शदीद क़हत और भुखमरी मुसल्लत की गई। भूख और कमज़ोरी की शिद्दत के बाइस उन्हें आसमान और ज़मीन के दरमियान हर तरफ़ धुएं का एक पर्दा सा तना हुआ दिखाई देता था।

दूसरे मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि यह “धुआँ” क़ियामत की बड़ी निशानियों में से एक मुस्तक़बिल की निशानी है जो क़ियामत के क़रीब ज़ाहिर होगा, जैसा कि हदीसों में भी इसका बयान आया है।

बहरहाल, यह वाज़ेह धुआँ अल्लाह के यक़ीनी अज़ाब की अलामत है, ताकि तकब्बुर करने वाले और ग़ाफ़िल लोग रब की क़ुदरत और पकड़ की हक़ीक़त को जान लें।

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