कुरान - 44:9 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ يَلۡعَبُونَ

Transliteration: (Bal hum fee shakkiny yal’aboon)

बल्कि वे तो शक में पड़े खेल रहे हैं [7]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 9

"बल्कि वे तो शक में पड़े खेल रहे हैं [7]।"

[7] मुनकिरीन-ए-हक़ का हाल-ए-ज़ार

यह आयत उन लोगों के रवैये का नक़्शा खींचती है जो हक़ का इनकार करते हैं। वाज़ेह निशानियों, मुक़द्दस वह्य और अक़्ली दलीलों के बावजूद वे शक और शुबहे में मुब्तला रहते हैं—इसलिए नहीं कि हक़ में कोई कमी है, बल्कि इसलिए कि उनके दिलों पर ग़फ़लत, तकब्बुर और हठधर्मी का पर्दा पड़ा हुआ है।

लफ़्ज़ “खेल रहे हैं” यह ज़ाहिर करता है कि वे ईमान और आख़िरत के संगीन मामलों को महज़ एक खेल-तमाशा समझ रहे हैं, गोया ज़िंदगी बिना किसी जवाबदेही के एक तफ़रीह हो। हक़ पर ग़ौर करने के बजाय वे दुनियावी ख़ुराफ़ात में गुम हैं और मज़ाक़ व लापरवाही में अपना वक़्त गँवा रहे हैं।

उनका यह शक कोई हक़ीक़त की तलाश नहीं बल्कि सरासर लापरवाही और ढिठाई है, जिससे वे हिदायत की क़ीमती फ़ुर्सत को खो रहे हैं। यह आयत याद दिलाती है कि दिलों का अंधापन अक्सर इंसान की अपनी लाई हुई ग़फ़लत और तकब्बुर का नतीजा होता है।

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