Transliteration: (Rabbis samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa; in kuntum mooqineen)
"आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है सबका रब, अगर तुम यक़ीन रखने वाले [4] हो।"
यह आयत इस हक़ीक़त के इज़हार से शुरू होती है कि अल्लाह तआला ही आसमानों, ज़मीन और जो कुछ इनके दरमियान मौजूद है, उन सबका वाहिद परवरदिगार और रब है। उसका इक़्तिदार और हुकूमत मुतलक़ और कायनात के हर ज़र्रे पर मुहीत है।
फ़रमाया गया “अगर तुम यक़ीन रखने वाले हो”—यह सुनने वालों को गहरी फ़िक्र की दावत देता है। अगर कोई शख़्स सच्चे दिल से यह यक़ीन रखता है कि अल्लाह ही तमाम जहानों का रब है, तो अक़्ल और दियानतदारी का यह खुला तकाज़ा है कि वह अल्लाह के भेजे हुए महबूब रसूल ﷺ को भी सच्चे दिल से तस्लीम करे।
जिस तरह किसी वज़ीर-ए-आज़म का इख़्तियार पूरी सल्तनत पर लागू होता है, ठीक उसी तरह हुज़ूर अकरम ﷺ की रिसालत—जिन्हें सारे जहानों के मालिके हक़ीक़ी ने भेजा है—सिर्फ़ एक क़ौम के लिए नहीं बल्कि तमाम जहानों (आलमीन) के लिए आम और मुहीत है। लिहाज़ा, अल्लाह की रुबूबियत पर यक़ीन लाज़िमी तौर पर हुज़ूर ﷺ की आलमी रिसालत पर यक़ीन की तरफ़ ले जाता है।
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