कुरान - 44:12 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
رَّبَّنَا ٱكۡشِفۡ عَنَّا ٱلۡعَذَابَ إِنَّا مُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Rabbanak shif 'annal 'azaaba innaa mu'minoon)

(वे उस दिन कहेंगे) "ऐ हमारे रब! हमसे अज़ाब हटा दे, बेशक हम ईमान लाते हैं (9)"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 12

"(वे उस दिन कहेंगे) 'ऐ हमारे रब! हमसे अज़ाब हटा दे, बेशक हम ईमान लाते हैं [9]'।"

[9] अज़ाब के वक़्त मुनकिरीन की बेबसी और पुकार

यह आयत मुनकिरीन की उस बेबसी और घबराहट को बयान करती है जब अज़ाब उनकी आँखों के सामने आ जाएगा। जब भूख, क़हत या धुएं का अज़ाब उन पर मुसल्लत हुआ, तो उनका सारा तकब्बुर ख़ाक में मिल गया और वे गिड़गिड़ा कर कहने लगे: “ऐ हमारे रब! हम पर से यह अज़ाब दूर फ़रमा दे, हम ईमान लाते हैं।”

मुशरिकीन-ए-मक्का ने हुज़ूर अकरम ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर होकर इल्तिजा की थी कि आप अपने रब से दुआ फ़रमाएं ताकि यह क़हत दूर हो जाए, और वादा किया था कि वे ईमान क़बूल कर लेंगे।

यह इस बात का खुला सबूत है कि मुनकिरीन भी दिल से जानते थे कि तकलीफ़ दूर करने का वसीला हुज़ूर ﷺ की मुक़द्दस ज़ात और आपकी दुआ है। लेकिन जब अज़ाब टल गया तो वे फिर अपने कुफ़्र पर लौट गए।

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