Transliteration: (Summaa tawallaw 'anhu wa qaaloo mu'allamum majnoon)
"फिर उन्होंने उनसे मुंह फेर लिया और कहा: 'सिखाया-पढ़ाया दीवाना [12] है'।"
यह आयत मुनकिरीन के बेतुके और मुतज़ाद (विरोधाभासी) रवैये को बेनक़ाब करती है। हुज़ूर अकरम ﷺ की सच्चाई, हिकमत और बेमिसाल सीरत-ओ-किरदार को अपनी आँखों से देखने के बावजूद उन्होंने हक़ से मुंह फेर लिया और बेबुनियाद इल्ज़ामात लगाने लगे।
उन्होंने एक तरफ़ तो आपको (मआज़अल्लाह) “दीवाना” कहा, और दूसरी तरफ़ यह भी दावा किया कि वे “सिखाए-पढ़ाए” हैं—यानी उन्हें किसी ने तरबियत दी है। यह खुला तज़ाद उनके ज़हनी दिवालियापन को ज़ाहिर करता है: जिस शख़्स को वे दीवाना कह रहे हैं, उसी पर यह तोहमत भी धरते हैं कि वह बक़ायदा तालीम हासिल करके कलाम पेश कर रहा है! यह दोनों बातें एक साथ कभी जमा नहीं हो सकतीं।
यह तोहमतें सिर्फ़ उन लोगों की लाचारी और हठधर्मी को ज़ाहिर करती हैं जो हक़ का मुक़ाबला करने से आजिज़ आ चुके थे। पैग़ाम का जवाब देने के बजाय उन्होंने पैग़म्बर की ज़ात पर हमला किया, जिससे उनकी अपनी ज़हनी पस्ती नुमायां हो गई।
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