कुरान - 44:33 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَءَاتَيۡنَٰهُم مِّنَ ٱلۡأٓيَٰتِ مَا فِيهِ بَلَـٰٓؤٞاْ مُّبِينٌ

Transliteration: (Wa aatainaahum minal aayaati maa feehi balaaa'um mubeen)

और हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ अता फ़रमाईं जिनमें खुली आज़माइश [34] थी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 33

"और हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ अता फ़रमाईं जिनमें खुली आज़माइश [34] थी।"

[34] नेअमतें और मोजिज़ात बतौर-ए-इम्तिहान

निशानियों से मुराद वे अज़ीम मोजिज़ात और नेअमतें हैं जो बनी इसराईल को अता की गईं—जैसे दरिया का फटकर रास्ते बन जाना, सहरा-ए-तीह में मन्न-ओ-सलवा का उतरना, और बादलों का साया अता होना।

ये अज़ीम निशानियाँ सिर्फ़ इनाम ही नहीं थीं बल्कि एक सख़्त इम्तिहान भी थीं, क्योंकि अल्लाह की दी हुई नेअमतें भी इंसान के लिए आज़माइश होती हैं ताकि देखा जाए कि वह शुक्रगुज़ारी करता है या नाफ़रमानी। इसीलिए यहाँ नेअमतों को ‘खुली आज़माइश’ (बलाउम-मुबीन) फ़रमाया गया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now