कुरान - 33:54 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
إِن تُبۡدُواْ شَيۡـًٔا أَوۡ تُخۡفُوهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٗا

Transliteration: (In tubdoo shai'an aw tukhfoohu fa innal laaha kaana bikulli shai'in 'Aleemaa)

चाहे तुम किसी चीज़ को ज़ाहिर करो या उसे छुपाओ, बेशक अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखने वाला [160] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 54

"चाहे तुम किसी चीज़ को ज़ाहिर करो या उसे छुपाओ, बेशक अल्लाह हर चीज़ का पूरा इल्म रखने वाला है।" [33:54]

अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है

यह आयत-ए-मुबारका अल्लाह तआला के कामिल और मुकम्मल इल्म को बयान फ़रमाती है। इंसान चाहे किसी बात को अपनी ज़बान या आमाल से ज़ाहिर करे या उसे अपने सीने के गोशों में छुपाए रखे, अल्लाह तआला से कायनात का कोई ज़र्रा और कोई भेद पोशीदा नहीं रह सकता।

गुस्ताख़ी और नाफ़रमानी पर सख़्त तंबीह

मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि अगर कोई शख़्स हुज़ूर ﷺ के विसाल के बाद आपकी अज़वाज से निकाह का दिल में ख़याल भी लाए, तो अल्लाह तआला उस दिली इरादे से भी पूरी तरह बा-ख़बर है और उस पर भी मुआख़ज़ा फ़रमाएगा।

यह आयत इस बात पर ज़ोर देती है कि अल्लाह की निगहबानी सिर्फ़ ज़ाहिरी आमाल तक महदूद नहीं—बल्कि उसमें ख़यालात, नीयतें और दिली इरादे भी शामिल हैं, जो उसके मुकम्मल इल्म और क़ुदरत की वाज़ेह दलील है।

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