Transliteration: (Liyu 'azzibal laahul munaafiqeena wal munaafiqaati walmushrikeena wal mushrikaati wa yatoobal laahu 'alal mu'mineena walmu'minaat; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema (section 9))
"ताकि अल्लाह मुनाफ़िक़ मर्दों और मुनाफ़िक़ औरतों, और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को अज़ाब दे [203], और अल्लाह मुसलमान मर्दों और मुसलमान औरतों की तौबा क़बूल फ़रमाए [204]; और अल्लाह बख़्शने वाला, बड़ा मेहरबान है।"
यहाँ लफ़्ज़ "लियुअज़्ज़िबा" में जो ‘लाम’ है वह आक़िबत (नतीजे) का लाम है, ग़रज़ व मक़सद का नहीं। इसका मतलब यह है कि इंसान को अमानत सौंपे जाने का नतीजा यह निकला कि:
जिन्होंने इसमें ख़ियानत की, जैसे मुनाफ़िक़ और मुशरिक, वे अज़ाब-ए-इलाही के मुस्तहिक़ बन गए।
यह वाज़ेह करता है कि अमानत एक आज़माइश थी, जिसने हर शख़्स की हक़ीक़त को बेनक़ाब कर दिया—और वफ़ादारों को बेवफ़ाओं से बिल्कुल अलग कर दिया।
दूसरी तरफ़ वे मोमिन मर्द और मोमिन औरतें जिन्होंने अमानत का हक़ अदा किया और उसमें ख़ियानत न की, उनकी तौबा को शरफ़-ए-क़बूलियत अता फ़रमाया जाता है।
ये वे लोग हैं जो अल्लाह और उसके हबीब ﷺ के वफ़ादार रहे। चुनांचे अमानत ने एक फ़र्क़ करने वाली लकीर खींच दी—यह साफ़ करते हुए कि कौन रहमत व मग़फ़िरत का हक़दार है और कौन अज़ाब का मुस्तहिक़।
सूरह अल-अहज़ाब का इख़्तिताम इस पाकीज़ा हक़ीक़त पर होता है कि अल्लाह बख़्शने वाला, बड़ा मेहरबान है, जो अपनी अख़लाक़ी और रूहानी ज़िम्मेदारियों को निभाने वालों की तौबा क़बूल फ़रमाने के लिए हमेशा तैयार रहता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat