कुरान - 33:69 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَكُونُواْ كَٱلَّذِينَ ءَاذَوۡاْ مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ ٱللَّهُ مِمَّا قَالُواْۚ وَكَانَ عِندَ ٱللَّهِ وَجِيهٗا

Transliteration: (Yaa aiyuhal lazeena aamanoo laa takoonoo kalla zeena aazaw Moosaa fa barra ahul laahu mimma qaaloo; wa kaana 'indal laahi wajeehaa)

ऐ ईमान वालो! उन लोगों जैसे न बनो जिन्होंने मूसा को ईज़ा (तकलीफ़) पहुंचाई, तो अल्लाह ने उन्हें उस बात से बरी फ़रमा दिया [192] जो उन्होंने कही थी [193]; और मूसा अल्लाह के नज़दीक बड़ी इज़्ज़त व मर्तबे वाले थे [194] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 69

"ऐ ईमान वालो! उन लोगों जैसे न बनो जिन्होंने मूसा को ईज़ा पहुंचाई, तो अल्लाह ने उन्हें उस बात से बरी फ़रमा दिया [192] जो उन्होंने कही थी [193]। और मूसा अल्लाह के नज़दीक बड़ी इज़्ज़त व मर्तबे वाले थे [194]।"

[192] अंबिया को ईज़ा पहुंचाना ईमान के ख़िलाफ़ है

यह आयत-ए-मुबारका अहले ईमान को ख़बरदार करती है कि वे उन लोगों के गुस्ताख़ाना तरीक़े की हरगिज़ पैरवी न करें जिन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को तकलीफ़ पहुंचाई थी।

जो शख़्स अल्लाह के नबी के अफ़आल पर नुक्ताचीनी करता है या एतराज़ उठाता है, वह ईमान के वक़ार के ख़िलाफ़ काम करता है। ऐसा रवैया कुफ़्र की अलामत है और सच्चे मोमिन के किरदार से मेल नहीं खाता।

[193] हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर झूठा इल्ज़ाम और आपकी बरात

बनी इस्राईल खुलेआम बे-लिबास होकर नहाते थे। लेकिन हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) हमेशा परदे में नहाते थे, जिससे उन्होंने बदगुमानी की और यह झूठी अफ़वाहें फैलाने लगे कि शायद आपके जिस्म में कोई पोशीदा ऐब या बीमारी है।

अल्लाह तआला ने इस बोहतान से आपकी बरात ज़ाहिर फ़रमाने के लिए एक मौजिज़ा ज़ाहिर फ़रमाया: जब आप नहा रहे थे तो जिस पत्थर पर आपका लिबास था वह हरकत करके आगे चल पड़ा। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) उसके पीछे दौड़े, तो बनी इस्राईल ने अपनी आँखों से देख लिया कि आपका मुक़द्दस जिस्म हर क़िस्म के ऐब से पाक व साफ़ है।

इस वाक़िए से कई अहम अहकाम साबित होते हैं:

  1. परदे में नहाना अंबिया-ए-किराम की मुक़द्दस सुन्नत है।

  2. अंबिया पर झूठे इल्ज़ामात तराशना बदतरीन काफ़िरों की ख़स्लत है।

  3. अल्लाह तआला ख़ुद अपने अंबिया की पाकीज़गी साबित फ़रमाता है—जैसा कि यहाँ पत्थर के मौजिज़े के ज़रिए हुआ।

  4. ज़रूरत के वक़्त सतर का खुलना जायज़ हो सकता है, जैसे तबीब या दाई के लिए मुआयने के वक़्त। यहाँ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का ज़ाहिर होना उम्मत के ईमान की हिफ़ाज़त के मक़सद से था।

[194] अंबिया अल्लाह के नज़दीक अज़ीम मर्तबे वाले हैं

यह आयत वाज़ेह फ़रमाती है कि अल्लाह की बारगाह में अंबिया-ए-किराम का मक़ाम इंतिहाई अज़ीम व बा-वक़ार है। जो कोई उनकी शान में कमी करे, वह दरअसल ख़ुद ज़लील व बे-वक़ार है।

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की शान में अल्लाह फ़रमाता है: "वे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़तदार हैं" (सूरह आल-ए-इमरान, 3:45)।

हक़ीक़त यह है कि अंबिया-ए-किराम के सदक़े ही से उनके पैरोकारों को इज़्ज़त और शराफ़त हासिल होती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now