Transliteration: (Rabbanaaa aatihim di'fai ni minal 'azaabi wal'anhum la nan kabeera (section 8))
"'ऐ हमारे रब! उन्हें आग का दोहरा अज़ाब दे और उन पर बहुत बड़ी लानत फ़रमा [191]!'"
क़यामत के दिन पैरवी करने वाले लोग अपने गुमराह सरदारों के लिए सख़्त तरीन अज़ाब की दुआ करेंगे, और अल्लाह से इल्तिजा करेंगे कि उनके अज़ाब को दोगुना कर दे और उन पर अज़ीम लानत फ़रमाए।
उनकी दलील यह होगी: “हम तो सिर्फ़ उनके पीछे चलकर भटके, मगर उन्होंने ख़ुद भी कुफ़्र इख़्तियार किया और दूसरों को भी गुमराह किया।”
यह आयत उस शदीद ज़िम्मेदारी को वाज़ेह करती है जो दूसरों को गुमराह करने वालों पर आयद होती है, ख़ास तौर पर जब वे ताक़त या असर-रसूल रखते हों। ऐसे लोगों की सज़ा कहीं ज़्यादा सख़्त होगी, क्योंकि उनका जुर्म सिर्फ़ अपना कुफ़्र ही नहीं बल्कि दूसरों को तबाह करना भी था।
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